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पालतू कुत्ते की कैसे करें देखभाल | Take care of your pet dog

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अपने पेट डॉग की देखभाल अच्छे से करनी चाहिए. जिससे उसका विकास अच्छे से हो सके.
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निम्नलिखित सभी बातों का ध्यान रखते हुए आप अपने पालतू कुत्ते या पेट डॉग की देखभाल अच्छे से कर सकते हैं.

पालतू कुत्तों या पेट डॉग्स की कैसे करें देखभाल –

कुत्तों को पालतू बनाए रखने का इतिहास 13000 से 30000 वर्ष तक पुराना भी हो सकता है ऐसा भी माना जाता है कि जब मनुष्य जंगलों में रहता था आदि मानव के रूप में रहता था तो पहला पशु जो पालतू बनाया गया वह कुत्ता ही था।. इसका अर्थ यह हुआ के कृषि के विकास से काफी पहले मनुष्य द्वारा कुत्ते को पालतू बना लिया गया था
कुत्ते को पालने अथवा साथ रखने का वर्णन महाभारत के युद्ध के समाप्त होने के पश्चात भी मिलता है जब पांडव युद्ध समाप्त होने के बाद अपना राजपाठ छोड़कर अंतिम यात्रा की ओर निकल रहे थे तब उनके साथ कुत्ता भी था। युधिष्ठिर के साथ चलते हुए उस कुत्ते ने भी पूरे हिमालय को पार कर लिया था ,ऐसा वर्णन महाभारत में भी मिलता है.
प्राचीन समय में जंगल में शिकार करते समय कुत्तों को साथ रखा जाता था और इतिहास की उस कड़ी से लेकर और वर्तमान समय में अब भी पालतू कुत्ते मनुष्य के जीवन में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभा रहे हैं और अपना योगदान दे रहे हैं .

पालतू कुत्तों या पेट डॉग्स ने अपनी काबिलियत को वफादारी जैसे महत्वपूर्ण गुणों को साबित करके अपना अनमोल योगदान मनुष्य के जीवन में दिया है .
आज के समय में पेट डॉग्स घर की सुरक्षा एवं पहरेदारी में ,सेना में आतंकवादियों का और विस्फोटकों का पता लगाने में, पुलिस द्वारा अपराधियों की धरपकड़ में, तस्करी को रोकने के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में उपयोग में लाए जाते हैं.

पालतू जानवर के रूप में पेट डॉग्स आज मनुष्यों के साथ बहुत बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं इसलिए उनकी देखभाल का, पालन पोषण का उचित तरीके से ध्यान रखना भी आवश्यक है.

पालतू कुत्तों या पेट डॉग्स की देखभाल करने के मुख्य बिंदु-

1 भोजन अथवा डाइट
2 वैक्सीनेशन
3 डिवर्मिंग
4 पेट मैनेजमेंट और ट्रेनिंग

1 . पेट डॉग्स की डाइट अथवा भोजन

अपने पेट डॉग्स के लिए डाइट प्लान बनाते समय पेट डॉग की ब्रीड,उसकी उम्र, उसका वजन एवं उसकी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पेट डॉग्स को संतुलित एवं पौष्टिक डाइट देनी आवश्यक होती है जिसमें पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट कैलोरीज प्रोटीन कैल्शियम फास्फोरस की मात्रा पूर्ण रूप से हो.
अपने पेट डॉग स्कोर तली भुनी या बाजार की चीजें खिलाने से हमेशा बचाना चाहिए और यह भी ध्यान रखना चाहिए
भी जो भी उसको भोजन दिया जा रहा है उसकी वजह से पेट डॉग्स ज्यादा फैटी या मोटे ना हो जाए.

2 . पेट डॉग का वैक्सीनेशन-
अपने पेट डॉग्स को बहुत सी बीमारियों से बचाने के लिए छोटे नवजात पिल्ले से लेकर और एक बड़े व्यस्क डॉग को भी वैक्सीनेशन की जरूरत होती है। पशु चिकित्सक की देखरेख में समय रहते हुए पेट डॉग्स को दिया गया वैक्सीनेशन उनको बहुत ही खतरनाक और वायरल बीमारियों से उनकी रक्षा करता है। पेट डॉग्स को दिया जाने वाला वैक्सीनेशन पूर्ण रूप से एक समय सारणी के हिसाब से किया जाता है.
पेट डॉग्स को दिए गए वैक्सीनेशन में केनाइन पार्वो वायरस, केनाइन डिस्टेंपर, इनफेक्शियस केनाइन हेपेटाइटिस, कैनाइन पैराइन्फ्लुएंजा, लेप्टोस्पाइरोसिस,केनाइन एडिनोवायरस आदि सभी रोगों से बचाव के लिए संयुक्त वैक्सीन जिसे प्राय सिक्स इन वन सेवन इन वन एट इन वन नाइन इन वन के नाम से भी जाना जाता है। इन वैक्सीनेशन के साथ-साथ समय रहते हुए प्रतिवर्ष रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी से बचाने के लिए अपने पेट डॉग को एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना भी अत्यंत आवश्यक है.
पेट डॉग्स को दिया जाने वाला वैक्सीनेशन पूर्ण रूप से पशु चिकित्सक की देखरेख में समय सारणी के अनुसार ही दिया जाना चाहिए.

3 . डिवर्मिंग पेट के कीड़े मारने की दवाई –
अपने पालतू कुत्तों या पेट डॉग्स समय सारणी के हिसाब से निश्चित अंतराल में अपने पशु चिकित्सक के निर्देशानुसार पेट के कीड़ों की दवाई देनी या डिवर्मिंग करवानी जरूरी होती है.

डिवर्मिंग की आवश्यकता-

सभी तरह के पेट डॉग्स में उनके पेट में कीड़े पनप जाते हैं जिससे ये कीड़े उनकी शारीरिक विकास को, उनके स्वास्थ्य को, उनके बालों की चमक को विभिन्न तरह से नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं.

इसलिए अपने पेट डॉग्स की सुचारू देखभाल करने के लिए उनको सही समय पर डिवर्मिंग करवाया जाना बहुत आवश्यक है ताकि उनकी शारीरिक विकास एवं वृद्धि सतत रूप से होती रहे.

4 . पेट डॉग केयर मैनेजमेंट और ट्रेनिंग-

पेट डॉग अथवा पालतू कुत्ते को अपने मालिक या अपने संस्थान के लिए अच्छे से उपयोग में लाया जा सके इसके लिए उनकी उचित तरीके से देखभाल करनी बहुत आवश्यक होती है . पेट डॉग के उठने बैठने की जगह की साफ-सफाई, उनकी रहने खाने – पीने के बर्तनों की स्वच्छता बहुत आवश्यक होती है . पेट डॉग्स के शरीर के विभिन्न अंगों की देखभाल करते समय उनके दांतों , कानों की और उनके बालों की साफ सफाई एवं स्वच्छता का विशेष रुप से ध्यान रखना जरूरी होता है .

अपने पेट डॉग्स को बीमार एवं आवारा कुत्तों के संपर्क में आने से बचाव करना चाहिए . अपने पेट डॉग को जूं और चीचड़ो से भी बचा कर रखना चाहिए . क्योंकि कुत्तों के शरीर पर लगने वाले जूं एवं चींचड़ कुत्तों में बहुत सी बीमारियों का कारण बनते हैं। कुत्तों में जूं या चींचड़ लगने की स्थिति में पशु चिकित्सक की देखरेख में दवाओं के उपयोग के द्वारा इनका निदान करवाया जाना चाहिए.

पेट डॉग की ट्रेनिंग एवं एक्सरसाइज –

अपने पेट डॉग्स को फैटी होने से बचाए रखने के लिए, चुस्त एवं सक्रिय बनाए रखने के लिए, उनकी खेलकूद एवं एक्सरसाइज अत्यंत आवश्यक होती है . पेट डॉग्स को एक्सरसाइज और खेलने कूदने के लिए समय मिलने से उनमें तनाव नहीं होता है.
अपने पेट डॉग्स को विभिन्न कामों में उपयोग में लाए रखने के लिए उचित प्रकार की नियमित ट्रेनिंग की आवश्यकता भी होती है. पेट डॉग सामाजिक रूप से लोगों के बीच में एवं भीड़भाड़ वाली स्थिति में अपना व्यवहार सामान्य रख सके इसके लिए भी उचित प्रकार से उनकी ट्रेनिंग होनी आवश्यक होती है . बहुत से शहरों में पेट डॉग्स की ट्रेनिंग के लिए अलग-अलग संस्थान उनको प्रोफेशनल ट्रेनर की सहायता से ट्रेन करते हैं.

इस प्रकार उपरोक्त सभी बातों का अच्छी तरह से ध्यान रखते हुए आप अपने पालतू कुत्ते या पेट डॉग की देखभाल अच्छे से कर सकते हैं और भिन्न-भिन्न तरह की बीमारियों से की रक्षा भी कर सकते हैं . इससे आपके पेट डॉग या पालतू कुत्ते का शारीरिक विकास और वृद्धि सुचारू एवं सतत रूप से होगी.

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